कब से खड़े हैं झोली पसार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कब से खड़े है झोली पसार,

क्यों न सुनो तुम हमारी पुकार,

जग रखवाला है, मेरे भोले बाबा,

तेरा ही सहारा है, मेरे भोले बाबा…….

देख लो लगी है,

आज मंदिर में ये भीड़ भारी,

दर्शनों के खातिर,

आये है लाखों नर और नारी,

आजा हे त्रिपुरारी,

दीनों ने पुकारा है, मेरे भोले बाबा

तेरा ही सहारा है, मेरे भोले बाबा………..

ज़िन्दगी से हारे,

हम ज़माने का हम लेके आये,

हाय रे इस जहाँ में,

लोग अपने हुए है पराये,

तेरे सिवा, दुनिया में,

कोई न हमारा है, मेरे भोले बाबा

तेरा ही सहारा है, मेरे भोले बाबा……

रास्ता न सूझे,

कहाँ जाएं मुसीबत के मारे

आशरा है तेरा,

दूर कर सारे संकट हमारे

सुनते हैं,

तूने ही लाखो को उबारा है, मेरे भोले बाबा

तेरा ही सहारा है, मेरे भोले बाबा…….

आ गए शरण में.

बोझ पापो का सर पे उठाये,

कर नज़र दया की,

भक्त जन ही गीत गाएं

सेवा में हमने तेरी,

जीवन ये गुजर है, मेरे भोले बाबा

तेरा ही सहारा है, मेरे भोले बाबा…….

कब से खड़े है झोली पसार,

क्यों न सुने तू हमारी पुकार

आसरा तुम्हारा है, मेरे भोले बाबा

तेरा ही सहारा है, मेरे भोले बाबा……

कब से खड़े हैं झौली पसार,

क्यों न सुनो तुम हमारी पुकार,

जग रखवाला है, मेरे भोले बाबा,

तेरा ही सहारा है, मेरे भोले बाबा…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।