साईं अली अली मेरे बाबा वली

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॥ पावन पाठ ॥

साईं अली अली मेरे बाबा वली,

आजाओ अब मेरी गली अली अली मेरे बाबा अली,

वली वली मेरे बाबा वली,

बाबा बिना न चाहू किसी को,

बाबा बिना ना मानु किसी को,

अली अली अली अली मेरे बाबा अली......

जब से नजर साईं ने मोड़ी ज़िन्दगी बेजान बेजार हुई,

साईं होठो की हसी है साईं मेरी मुश्कान है,

बाबा अपना दीदार दे मुझे थोरा सा प्यार मच रहे है खलबली

साईं अली अली मेरे बाबा वली..........

हाथ पकड़लो मेरा तुम थोरा सकून मिल जायेगा,

मुदत से वीरानी है ये ज़िन्दगी मेरा चमन खिल जाये गा,

साईं मेरी ज़िन्दगी है साईं मेरा ईमान है,

बाबा अपना देदार दे मुझे थोरा सा प्यार,

मच रहे है खलबली,

साईं अली अली मेरे बाबा वली.....

तेरे दर पे मेरे बाबा जो भी सवाली आता है,

दावा है तेरा बाबा कभी खाली वो तो नही जाता है,

हम फकीरों की भी दुआ काबुल कर लो साईं,

तेरे दर पे बेठी हु सकून देदो साईं,

बाबा अपना दीदार मुझे थोरा सा प्यार,

मच रही खलबली,

साईं अली अली मेरे बाबा वली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।