ये दूरी ये जुदाई मुझे ना रास आई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये दूरी ये जुदाई मुझे ना रास आई,

तेरे बिना ये संसार सुनले मेरे लखदातार,

लगे जैसे हो गहरी खाई,

ये दूरी ये जुदाई मुझे ना रास आई....

जिस और जहाँ भी मैं देखूं,

धोखा और झूठ नज़र आये,

मोहमाया और रिश्ते नाते,

सब छल से मिले बशर आये,

इनसे होके मैं लाचार आया तेरे दरबार,

झूठी प्रीत ना मुझको भायी,

ये दूरी ये जुदाई मुझे ना रास आई....

ये दुनिया पागलखाना है तेरा दर ही मेरा ठिकाना है,

तेरे नाम की मस्ती का प्यासा तेरा दर मेरा मैखाना है,

चढ़ा जबसे खुमार रटूं ये ही बार बार,

हैं प्यार की ये गहराई,

ये दूरी ये जुदाई मुझे ना रास आई.....

धीरज तेरे दर से मिला मुझको दीवाना तेरा मैं बन बैठा,

बन कर के लहू मेरी नस नस में तेरे प्यार का सागर उमड़ बैठा,

मुझपे तेरा है अधिकार मेरे खाटू के सरकार,

अब सुनले मेरी दुहाई,

ये दूरी ये जुदाई मुझे ना रास आई....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।