भोलेनाथ पिया छोड़ो मोरी बैया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोलेनाथ पिया छोड़ो मोरी बैया,

मानूं ना थारी बात पीहर जावण दे…..

सुन भोले जोगियां,

ना घोटूं तेरी भंगहिया

गौरा तेरी मजबूर है

भांग में घोटा लगा ना सकुंगी,

थक के होगी चूर मैं,

दुखे दोनों मेरे हाथ रे पीहर जावण दे,

भोलेनाथ पिया छोड़ो मोरी बैया,

मानूं ना थारी बात पीहर जावण दे…..

सुनले गोरा रानी,

करो न नादानी

भांग को पीना जरुरी है,

भांग बिना मैं रह ना सकूंगा,

भोला तेरा मजबूर है,

मेरी पूरी करदे मांग,

भांग मन्ने पीवण दे

भोलेनाथ पिया छोड़ो मोरी बैया,

मानूं ना थारी बात पीहर जावण दे.....

सुनो शिव रसियां,

ना छोड़ोगे भंगियाँ

जाएगी गोरा तुम से दूर है

मुँह मैं तुमसे मोड़ लूंगी,

किया नशा जो भरपूर है

अब लेके गणेश को साथ,

पीहर जावन दे

भोलेनाथ पिया छोड़ो मोरी बैया,

मानूं ना थारी बात पीहर जावण दे….

गोरा बात मान ले,

तू हाल मेरा जान ले,

भांग तो पीनी जरूर है

आज ही पीऊंगा भांग,

कल ना पीऊंगा शर्त्त ये मंजूर है

भांग मने पीवण दे

भोलेनाथ पिया छोड़ो मोरी बैया,

मानूं ना थारी बात पीहर जावण दे…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।