बड़ा है दयालु भोलेनाथ

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

( शिव समान दाता नहीं,

विपत निवारण हार,

लज्जा सबकी राखियो,

ओ नंदी के असवार। )

बड़ा है दयालु,

भोलेनाथ डमरुँ वाला,

जिनके गले में विषधर काला,

नीलकंठ वाला,

भोलेनाथ डमरुँ वाला,

बड़ा है दयालु,

भोलेनाथ डमरु वाला…..

बैठे पर्वत धुनि रमाए,

बदन पड़ी मृगछाला है,

कालो के महाकाल सदाशिव,

जिनका रूप निराला है,

उनकी गोदी में गजानन लाला,

नीलकंठ वाला,

भोलेनाथ डमरुँ वाला,

बड़ा है दयालु,

भोलेनाथ डमरु वाला…..

शीश चन्द्रमा जटा में गंगा,

बदन पे भस्मी चोला है,

तीन लोक में नीलकन्ठ सा,

देव ना कोई दूजा है,

पि गए पि गए विष का प्याला,

नीलकंठ वाला,

भोलेनाथ डमरुँ वाला,

बड़ा है दयालु,

भोलेनाथ डमरु वाला…….

बड़ा है दयालु,

भोलेनाथ डमरुँ वाला,

जिनके गले में विषधर काला,

नीलकंठ वाला,

भोलेनाथ डमरुँ वाला,

बड़ा है दयालु,

भोलेनाथ डमरु वाला…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।