माँ भगवती जगदम्बिके नारायणी दुर्गे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ भगवती जगदम्बिके नारायणी दुर्गे,

अपने इस बालक को वरदे वरदे ।।

रोग, शोक, अज्ञान, पाप को,

माया के विविध विलाप को,

संसार के घोर ताप को,

सब पीड़ा को हरले, सब पीड़ा को हरले,

माँ भगवती जगदम्बिके नारायणी दुर्गे ।

धन संपदा, भक्ति, ज्ञान का,

अतुल वैभव, शक्ति, मान का,

सदा निरन्तर तेरे गुणगान का,

वर दायनी वरदे, वर दायनी वरदे,

माँ भगवती जगदम्बिके नारायणी दुर्गे ।

बालक की ये विनम्र प्रार्थना,

जाए यूँ ही व्यर्थ मात ना,

ममता की ही रखले लाज ना,

हरिशरण कहे सुनले, हरिशरण कहे सुनले,

माँ भगवती जगदम्बिके नारायणी दुर्गे ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।