मोहे जाना पड़े जरूर भोला बैठा बाट में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सिर पर गठरी भांग की मोहे जाना पड़े जरूर,

भोला बैठा बाट में....

मैं गई गंगा स्नान को,

मुझे पीछे आई ध्यान हो,

वहां भांग खड़ी घनघोर, भोला बैठा बाट में,

मेरे सिर पर गठरी भांग की.....

गोरा गठरी लावे भांग की,

मोहे घोट घोट के पिलावेगी,

वह तो रहे नशे में चूर, भुला बैठा बाट में,

मेरे सिर पर गठरी भांग की.....

गोरा रोवती डोले पहाड़ पर,

मेरी चुनरी इलझी झाड़ में,

यह पर्वत कितनी दूर, भोला बैठा बाट में,

मेरे सिर पर गठरी भांग की.....

मेरे पैरों में छाले पड़ गए,

गोदी में उठा ले ओ भोले,

हुई चलने से मजबूर, भोला बैठा बाट में,

मेरे सिर पर गठरी भांग की.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।