जिन कुशल गुरु जो मिले

नागेश कांठा
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - होठो से छु लो तुम

किस्मत पर नाज करू, जिन कुशल गुरु जो मिले,

हर कदम ये हाथ पकड़, हरपल मेरे साथ चले,

किस्मत पर नाज करू.....

रोशन हुई दुनिया मेरी, जब आया गुरु की शरण,

तन मन धन करू जीवन, गुरु चरणों मे अर्पण,

जिंदगी का भरोसा क्या, दुबारा मिले न मिले,

हर कदम ये हाथ पकड़, हरपल मेरे साथ चले,

किस्मत पर नाज करू.....

गुरु ग्यान की ज्योति है, अज्ञान तिमिर हर ले,

गुरु अनमोल मोती है, तू ध्यान जरा धर ले,

कोई प्रबल पुण्य से ही, गुरुदेव की भक्ति मिले,

हर कदम ये हाथ पकड़, हरपल मेरे साथ चले,

किस्मत पर नाज करू.....

"दिलबर" ये तमन्ना है, कभी गुरुवर न रूठे,

जीवन की अंतिम सांस, गुरु चरणों मे छुटे,

फिर क्या मांगे नागेश, जो ऐसी सौगात मिले,

किस्मत पर नाज करू,जिन कुशल गुरु जो मिले,

हर कदम ये हाथ पकड़, हरपल मेरे साथ चले,

किस्मत पर नाज करू.....

गायक -नागेश कांठा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।