भोले चला नहीं जाता सावन का मेला आ गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले चला नहीं जाता सावन का मेला आ गया,

सावन का मेला आ गया सावन का मेला आ गया....

तेरे रस्ते में घोर अंधेर कैसे पर मैं आऊं,

मैं ज्योत जगा दूंगा तो क्यू रे भगत घबरा गया,

भोले चला नहीं जाता सावन का मेला आ गया....

मेरे पास ना पैसा धेला कैसे दर पर मैं आऊं,

मैं झोलियां भर दूँगा तू क्यू रे भगत घबरा गया,

भोले चला नहीं जाता सावन का मेला आ गया....

तेरे मंदिर ऊँची चढाई कैसे पर मैं आऊं,

मैं बाह पकड़ लूँगा तू क्यू रे भगत घबरा गया,

भोले चला नहीं जाता सावन का मेला आ गया....

डोले बीच भंवर मेरी नैया भोले मैं घबराऊ,

मैं पार लगा दूंगा तू क्यू रे भगत घबरा गया,

भोले चला नहीं जाता सावन का मेला आ गया....

लगा मन मंदिर में समाधि दे खोल तू मन के द्वार,

मैं दर्श दिखा दूंगा तू तक्यू रे भगत घबरा गया,

भोले चला नहीं जाता सावन का मेला आ गया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।