जयकारा तू लगा कावड़ियाँ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बम भोले जयकारा तू लगा कावड़ियाँ,

गंगा जल तू भोले पे चढ़ा कावड़ियाँ,

भोला सुनेहरा अर्ज को तेरी पूरी करेगा सारी मुरादे तुम्हारी,

ऐसा है त्रिपुरारी जयकारा तू लगा कावड़ियाँ,

भोला बड़ा है भोला बाला जब तुम से खुश होगा,

सुख भर देगा दुःख हर लेगा जयकारा तू लगा कावड़ियाँ…..

पावन मन से गंगा से जल भरके तू चलता चल,

नाम सुमिर के आगे बढ़ तू शिव शम्भू का हर पल,

गंगा जल से शिव शंकर को जब तू नेहलायेगा,

भोला भाला उमा पति तुमसे खुश हो जाएगा,

खुश करके भोले से तू जो मांगे वो पायेगा,

लख चौरासी तर कर तू मोक्श को पायेगा,

शरण में आया जो आया उसने पाई भोले की महिमा सारी भैया अति भारी,

ओ भोले भंडारी जयकारा तू लगा कावड़ियाँ…..

गंगा जल को लेकर चल तू शिव जी के द्वार,

भोले को करा दे गंगा जल से इशनान,

शिव का मिलान गंगा जल से जो होगा,

तब महादेव तेरा कर देंगे कल्याण,

भोला भंडारी तेरे संकट हर लेते सारे,

शार्दुल के सोये भाग पल में जागे गे सारे,

हे महादेवा करे तेरी सेवा शरण में अब तो लेले,

किरपा बरसादे दर्श तो दिखादे नसीबा जाग जाएगा,

ओ भोले भंडारी जयकारा तू लगा कावड़ियाँ…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।