रे मन चल तू अब तो साईं दवारे,

अनूप जलोटा
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॥ पावन पाठ ॥

रे मन चल तू अब तो साईं दवारे,

अब तो साईं दवारे मनवा,

रे मन चल तू अब तो साईं दवारे,

हर घडी तुझको साईं भुलाये तू ओरो से प्रीत लगाये,

साथ न देगा कोई जीवन में क्यों और ने गुण खाले,

रे मन चल तू अब तो साईं दवारे,

माया मोह का झूठा फंदा जिसमे फसा तू मुरख बाँदा,

भूल जा अब तू गोरख धंदा मान के एक सपना रे,

रे मन चल तू अब तो साईं दवारे,

जीवन सारा बिफल गवाया तू ही बता तूने क्या क्या पाया,

अनत समय वोही काम न आया जिसे समजा अपना रे,

रे मन चल तू अब तो साईं दवारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।