भांग का सरूर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बण गया सरूर और होया ढंग सै,

होया ढंग सै भोले होया ढंग सै,

लगा के घोटा आज मन्ने,

भोले या पीली तेरी भंग सै,

बण गया सरूर और होया ढंग सै,

होया ढंग सै भोले होया ढंग सै.....

फिर गए पैर मेरा ना सोधी में गात

खोल बताऊँ भोले तन्ने या बात,

कर दे ऐसी करामात कोई,

भगति का चढ़ ज्या यो रंग सै,

बण गया सरूर और होया ढंग सै,

होया ढंग सै भोले होया ढंग सै.....

तेरा भगत तो देखे तेरी बाट,

और तो लाग रहे सारे ठाट,

किसे चीज का तोडा ना,

नाचे मेरा अंग अंग सै,

बण गया सरूर और होया ढंग सै,

होया ढंग सै भोले होया ढंग सै.....

नाचूँ भोले पहन तेरी माला,

ना बाजी खेड़ी आला करे टाला,

मन्ने डरना सै किस बात ते,

जब शिव शंकर तू मेरे संग सै,

बण गया सरूर और होया ढंग सै,

होया ढंग सै भोले होया ढंग सै.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।