कांवड़ सजा के चालो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कांवड़ सजा के चालो,

सावन ऋतू है आई,

भक्तो को शिव ने अपने,

आवाज है लगाई,

कावड़ सजा के चालो,

सावन ऋतू है आई....

सावन की ऋतू है प्यारी,

भक्तो करो तयारी,

शिव गौरा से मिलन की,

मन में उमंग भारी,

मन में उमंग भारी,

तन हो गया है फागण,

मन में बसंत छाई,

कावड़ सजा के चालो,

सावन ऋतू है आई....

जीवन है तेरा छोटा,

बातों में ना लगाना,

जब जब भी आए सावन,

कांवड़ शिव चरण चढ़ाना,

जिस भक्त के ये भाव,

जिस भक्त के ये भाव,

उसने शिव कृपा है पाई,

कावड़ सजा के चालो,

सावन ऋतू है आई.....

आदेश शिव का होता,

दर्शन को सभी है पाते,

शिव की कृपा जो होती,

कांवड़ तभी उठाते,

हमने भी शिव कृपा से,

हमने भी शिव कृपा से,

जीवन में कृपा ये पाई,

कावड़ सजा के चालो,

सावन ऋतू है आई.....

कांवड़ सजा के चालो,

सावन ऋतू है आई,

भक्तो को शिव ने अपने,

आवाज है लगाई,

कावड़ सजा के चालो,

सावन ऋतू है आई.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।