शीशा टूट गया प्रेम वाला चूर हो गया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

शीशा टूट गया प्रेम वाला चूर हो गया,

हो सतगुरु माफ करो यह कसूर हो गया,

शीशा टूट गया प्रेम वाला चूर हो गया....

बाबा जी ने मंदिर बनाया ईटा जोड़ जोड़ के,

हो संगता दर्शना नू आईया बड़ी दूर दूर से,

शीशा टूट गया प्रेम.........

बाबा जी ने सराय बनाईया कमरा जोड़ जोड़ के,

हो संगता रहने जो आईया बड़ी दूर दूर से,

शीशा टूट गया प्रेम........

सतगुरु बाग लगाया फुला जोड़ जोड़ के,

हो संगता घूमने जो आईया बड़ी दूर दूर से,

शीशा टूट गया प्रेम........

सतगुरु लंगर लगाया दाना जोड़ जोड़ के,

हो संगता खाने जो आईया बड़ी दूर दूर से,

शीशा टूट गया प्रेम.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।