मोर अंगना मा गाड़े जैतखाम

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॥ पावन पाठ ॥

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना,

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना...

ये बाबा तोर नाव के निशानी हा,

अमर रहय ना……

ये बाबा तोर नाव के निशानी हा,

अमर रहय ना……

अमर रहय ना……

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना,

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना...

सुरहिन गय्या के गोबर मँगायेंव गा गोबर मँगायेंव,

सुरहिन गय्या के गोबर मँगायेंव गा गोबर मँगायेंव,

सुरहिन गय्या के गोबर मँगायेंव गा गोबर मँगायेंव,

सुरहिन गय्या के गोबर मँगायेंव गा गोबर मँगायेंव....

ये घुट धरी अंगना सुन्दर लिपायेंव गा सुन्दर लिपायेंव,

घुट धरी अंगना सुन्दर लिपायेंव गा सुन्दर लिपायेंव,

ये घुट धरी अंगना सुन्दर लिपायेंव गा सुन्दर लिपायेंव,

घुट धरी अंगना सुन्दर लिपायेंव गा सुन्दर लिपायेंव,

बाबा तोर जुबानी हा अमर रहय ना,

बाबा तोर जुबानी हा अमर रहय ना,

अमर रहय ना……

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना,

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना....

गज मोतिन अन्न कर चौंक पुरायेंव गा चौका पुरायेंव,

गज मोतिन अन्न कर चौंक पुरायेंव गा चौका पुरायेंव,

गज मोतिन अन्न कर चौंक पुरायेंव गा चौका पुरायेंव,

गज मोतिन अन्न कर चौंक पुरायेंव गा चौका पुरायेंव,

ये सोन कर कलसा सुन्दर मढ़ायेंव गा सुन्दर मढ़ायेंव,

सोन कर कलसा सुन्दर मढ़ायेंव गा सुन्दर मढ़ायेंव,

ये सोन कर कलसा सुन्दर मढ़ायेंव गा सुन्दर मढ़ायेंव,

सोन कर कलसा सुन्दर मढ़ायेंव गा सुन्दर मढ़ायेंव,

ये बाबा तोर ज्ञानी हा अमर रहय ना,

ये बाबा तोर ज्ञानी हा अमर रहय ना,

अमर रहय ना……

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना,

मोर अंगना मा गड़ायेंव जैतखाम,

ओ बाबा तोर नाव के निशानी अमर रहय ना....

ये दियना जलाके बाबा चौंका कराएंव गा चौंका कराएंव,

दियना जलाके बाबा चौंका कराएंव गा चौंका कराएंव,

ये दियना जलाके बाबा चौंका कराएंव गा चौंका कराएंव,

दियना जलाके बाबा चौंका कराएंव गा चौंका कराएंव,

ये धजा ला चढ़ाएंव तोरे जयंती मनायेंव गा जयंती मनायेंव,

धजा ला चढ़ाएंव तोरे जयंती मनायेंव गा जयंती मनायेंव,

ये धजा ला चढ़ाएंव तोरे जयंती मनायेंव गा जयंती मनायेंव,

धजा ला चढ़ाएंव तोरे जयंती मनायेंव गा जयंती मनायेंव,

ये बाबा तोर कहानी हा अमर रहय ना,

ये बाबा तोर कहानी हा अमर रहय ना,

अमर रहय ना……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।