इस में बसा है जी डमरू वाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तन मेरा मंदिर और मन है शिवाला ,

इसमें बसा है जी बस डमरू वाला,

दिन रात जपता हु बस उसकी माला,

इसमें बसा है जी धमरू वाला,

मुझको ना जाने ये क्या हो गया है,उसकी गली में दिल खो गया है,

ना जाने कैसा ये जद्दू ढाला,इसमें बसा है जी धमरू वाला,

भोले के संग कैसी लागी लगन है आई न नींदिया लगे भूख कम है,

ना पियु पानी न शुहू निवाला इस में बसा है जी डमरू वाला,

देखा यहाँ तक नजर मेरी जाये भोला ही भोला नजर मुझको आये,

रहता है आँखों में उसका उजाला इस में बसा है जी डमरू वाला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।