जागो जागो जागो ज्वाला माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जागो जागो जागो, ज्वाला माँ,

जग में करो, उजाला माँ ll

आओ, ज्योत में, आन समाओ,

सब, भक्तों को, आज दिखाओ,

अपना, नूर निराला माँ,,,

जागो जागो जागो, ज्वाला माँ,,,,,

( माँ )

मिले, मन की ज्योति से, "ज्योति तुम्हारी" l

सदा, किरपा हम पे माँ, "होती तुम्हारी" ll

सजाया, भवन लाल, चुनरी चढ़ाई,

क्यों, अब तक तुम्हारी, सवारी ना आई,

हे जग की, प्रितपाला माँ,,,

जागो जागो जागो, ज्वाला माँ,,,,,

( माँ )

हमाको के, जग से, "अँधेरे मिटा दो" l

छुपे, रात में जो, "सवेरे दिखा दो" ll

उमीदों, की नईया, किनारे लगा दो,

तुम, ऐसी प्रचंड आज, ज्योति जगा दो,

रहे ना मन कोई, कर माँ,,,

जागो जागो जागो, ज्वाला माँ,,,,,

( माँ )

ज्योत, तुम्हारी है, "सूर्य के अंदर" l

तुम से, उजाला, "मांगे माँ चंद्र" ll

छत छत नमन, करे माँ सुरेंद्र,

रोशन क़र दो, मन का मंदिर,

लता जपे, नित मन माँ,,,

जागो जागो जागो, ज्वाला माँ,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।