रघुवर ने धनुष को दिया तोड़

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रघुवर ने उठाकर धनुष को दिया तोड़,

जय-जय की झंकार मची है चारों ओर....

धनुष को टूटा सुनके सिया मुस्कुराई,

आके गले में जयमाला पहनाई,

जय माला पहनाकर लोगों ने किया शोर,

जय-जय की झंकार मची है चारों ओर.....

धनुष को टूटा सुनकर परशुराम आए,

आके सभा में कड़े वचन सुनाएं,

वचनों को सुनकर के हुई है तोड़फोड़,

जय-जय की झंकार मची है चारों ओर....

राजतिलक सुन कर मात घबराए,

आकर राजा को अपने वचन सुनाएं,

वचनों को सुनकर के हुए हैं बेहोश,

जय-जय की झंकार मची है चारों ओर....

भरत ने पूछा माता राम कहां हैं,

राम कहां है माता लखन कहां हैं,

माता ने बतलाया गए है वन की ओर,

जय-जय की झंकार मची है चारों ओर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।