नेकी के कर्म किए जा

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॥ पावन पाठ ॥

नेकी के कर्म किए जा रे दुनिया से जाने वाले,

दुनिया से जाने वाले दुनिया से जाने वाले,

नेकी के कर्म किए जा रे दुनिया से जाने वाले.....

यह तन तेरा है बगिया नेकी एक छीर समुंदर,

इस बगिया के फल खा जा रे दुनिया से जाने वाले,

नेकी के कर्म....

यह कंचन काया तेरी हो अंत राख की ढेरी,

हो सके तो पुण्य कमा जा रे दुनिया से जाने वाले,

नेकी के कर्म.....

यह धन योवन संसारी है दो दिन की फुलवारी,

कोई खुद रंग फूल खिला जा रे दुनिया से जाने वाले,

नेकी के कर्म.....

है जग सेवा फल मेवा कर दीन दुखी की सेवा,

यस पाना है तो पा जा रे दुनिया से जाने वाले,

नेकी के कर्म.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।