शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी,

लेकर गगरी हो रामा लेकर गगरी,

शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी....

रूप देखकर पार्वती से बोला सागर पानी,

कौन तुम्हारे माता-पिता हैं कौन पुरुष की नारी,

किसको भरने आई पनिया लेकर गगरी,

शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी....

राजा हिमाचल पिता हमारे मेनावत महतारी,

शिव शंकर हैं पति हमारे मैं उनकी घरवाली,

उनको भरने आई पनिया लेकर गगरी,

शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी....

शिव शंकर हे जन्म जोगिया घर घर अलख जगामें,

चौदह रतन मेरे घर अंदर बैठी मौज उड़ाओ,

बंजा मेरी रे तू रनिया लेकर गगरी,

शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी....

इतनी बात सुनी शंकर ने सागर धोरे आए,

शेषनाग की बना मथानिया चौदह रतन निकाले,

डाली सागर में मथनिया लेकर गगरी,

शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी....

सात समुंदर थरथर कांपे जल पड़ गए सब खारे,

हाथ जोड़कर सागर बोला सुन लो डमरू वाले,

मैं ना चाहूं तेरी रनिया लेकर गगरी,

शिव की गौरा चली पनिया लेकर गगरी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।