सीता आगे धरे ना पांव

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सीता आगे धरे ना पांव मुड़ कर देख रही पीछे को,

मुड़ मुड़ देख रही पीछे को, मुड़-मुड़ देख रही पीहर को,

सीता आगे धरे ना पांव....

सब आई संग की सहेली जिनके संग पीहर में खेली,

आंसू रोके रुकते नाय मुड़ मुड़ देख रही पीछे को,

सीता आगे धरे ना पांव....

पिता रोवे खंब पकड़ के जग रोवे आंसू भर के,

मां की ममता देखी ना जाए मुड़ मुड़ देख रही पीछे को,

सीता आगे धरे ना पांव....

वह जगत पिता जगदीश्वर है तेरे पति परमेश्वर,

बेटी जानो पड़े ससुराल मुड़ मुड़ देख रही पीछे को,

सीता आगे धरे ना पांव....

वह जनक नंदिनी बिटिया मिथिला नरेश घर रनिया,

सखियां विदा करें समझाएं मुड़ मुड़ देख रही पीछे को,

सीता आगे धरे ना पांव....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।