दिल ने दिल भरके ना देखी मूर्ति सिया राम की

संत सूरदास
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दिल ने दिल भरके ना देखी मूर्ति सिया राम की,

याद आती है कलेजे में मेरे भगवान की,

दिल ने दिल भरके ना देखी.....

प्रेम हो तो ऐसा हो जैसा किया मीराबाई ने,

बनके जोगन चल पड़ी ले माला हरि के नाम की,

दिल ने दिल भरके ना देखी.....

भक्ति हो तो ऐसी हो जैसी करी हनुमान ने,

फाड़कर छाती दिखा दी मूर्ति सिया राम की,

दिल ने दिल भरके ना देखी.....

फोड़ कर आंखें यू बोले बिलवा मंगल सूरदास,

जिनमें छवि हरि कि नहीं वह आंख हैं किस काम की,

दिल ने दिल भरके ना देखी.....

तुझको तुझसे मांगती हूं देना हो तो दे मुझे,

दुनिया की धन और यह दौलत है मेरे किस काम की,

दिल ने दिल भरके ना देखी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।