सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे अंजनी के ललन ने

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे अंजनी के ललन ने,

अंजनी के ललन ने माता अंजनी के ललन ने,

सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे....

सिया जी ने पूछा मेरा सिंदूर कहां है,

सिंदूर कहां है मेरा सिन्दूर कहां है,

लाल लाल मुखड़ा दिखा दियो रे अंजनी के ललन ने,

सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे....

सिया जी ने पूछा मेरा सिंदूर कहां है,

सिंदूर कहां है मेरा सिन्दूर कहां है,

लाल लाल चूरमा दिखा दियो रे अंजनी के ललन ने,

सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे....

सिया जी ने पूछा मेरा सिंदूर कहां है,

सिंदूर कहां है मेरा सिन्दूर कहां है,

लाल लाल चोला दिखा दियो रे अंजनी के ललन ने,

सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे....

सिया जी ने पूछा मेरा सिंदूर कहां है,

सिंदूर कहां है मेरा सिन्दूर कहां है,

लाल लंगोटा दिखा दियो रे अंजनी के ललन ने,

सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे....

सीता जी ने पूछा हनुमत प्यारा तेरा कौन है,

सीना चीर दिखा दियो रे अंजनी के ललन ने,

सीता जी का सिंदूर चुरा लियो रे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।