घर से परसों की कहन गए श्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घर से परसों की कहन गए श्याम ना आए बरसों बीत गए.....

बरसों की तो कह गए मोहन किंतु बिता दिए बरसो,

कब आवेगी बैरन परसों अखियन लागी तरसो,

अंखिया लरसों निस दिन भर से आठो याम,

ना आए बरसों बीत गए....

ऋतु कंत आवे बसंत खेतन मैं फूली सरसों,

मिलन हेतु मे मुरलीधर सों घर ही घर में तरसों,

राधा वर सों मेरो कह दीज्यो प्रणाम,

ना आए बरसों बीत गए.....

उजड़ी मथुरा बस गई अब तो बस्ती गई उजड़ सों,

मथुरा वाली अपनी है गई राधा है गई परसो,

मानो बृजवासी पे गयो विधाता हार,

ना आए बरसों बीत गए....

विषधर कालिया गयो है जब ते वंचित रही ज़हर सों,

मरने लायक नहीं रह गई लटकी रह अधर सों,

तडपत रह गई गयी कलेजा हार,

ना आए बरसों बीत गए.....

आचार्य राजकृष्ण

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।