बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात,

कोई ना पूछे बात बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

आया बुढ़ापा कह गया मेरे कान में बात,

मीठा बोलो झुक के चालो लाठी तो ले लो हाथ,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

अंदर से वह बेटा आया सुन माता मेरी बात,

चारों कोने पड़े हैं घर में कहीं तो बिछा लो खाट,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

अंदर से वह बहुअल आयी सुन मेरी बात,

घर की चाबी हमको दे दो तुमको रहे ना याद,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

अंदर से वह पोते आए सुन दादी मेरी बात,

सारी रात तू खो खो करती बाहर बिछा लो खाट,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

सासरे से बेटी आई सुन मैया मेरी बात,

जब जब मैं पीहर को आऊ तेरी सतावे याद,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

बाहर से वो धेवते आए सुन नानी मेरी बात,

तुम तो मरोगी हमें क्या दोगी तुमको करेंगे हम याद,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

बाहर से वह सतगुरु आए सुन पगली मेरी बात,

राम नाम की माला ले लो यही जाएगी तेरे साथ,

बुढ़ापा बैरी कोई ना पूछे बात....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।