मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

ब्रज नगरी में टेडी मेडी गलियां,

अरे मन पापी गलियन में भटक मत जाइयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

ब्रज गलियों में कीचड़ बहुत है,

अरे मन पापी कीचड़ में फिसल मत जइयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

बरसाने में ऊंची हवेली,

अरे मन पापी राधा रानी के दर्शन कराइयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

वृंदावन में बांके बिहारी,

अरे मन पापी चरणों में शीश झुकाइयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

गोवर्धन में मानसि गंगा,

अरे मन पापी गंगा में गोता लगाइयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

गोवर्धन में गिरिराज पर्वत,

अरे मन पापी परिक्रमा लगा घर आईयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

ब्रज नगरी में गैया बहुत हैं,

अरे मन पापी गो दान कराकर आईयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

ब्रज नगरी में कन्या बहुत हैं,

अरे मन पापी कन्यादान कराकर आईयो,

अरे मन पापी मोहे ब्रज नगरी में घुमाईयो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।