की कहने मेरे हारा वाले दे की कहने

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॥ पावन पाठ ॥

की कहने की कहने मेरे हारा वाले दे की कहने.....

धरती नच्चे अम्बर नच्चे नच्दे चंद सितारे,

ऐसी किरपा करती प्रभु ने हो गये वारे न्यारे,

मेले लगदे सदा ही रहने,

की कहने की कहने मेरे हारा वाले दे की कहने.....

नाम तेरे दी ऐसी मस्ती सब भगता ते चढ़ गई,

भव सागर विच डूबदी बेड़ी तेरे आसरे तर गई,

मैं जावा बलिहार कि केहने,

की कहने की कहने मेरे हारा वाले दे की कहने.....

जो भी आया दर तेरे ते सबना ने तर जाना,

दास तेरा नाम दे विच रंगया ही है जाना,

साडे तू मन ले कहने,

की कहने की कहने मेरे हारा वाले दे की कहने.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।