बिठांवां कित्थे श्याम नूं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कुल्ली निक्की जही, थोड़िया ने थांवां,

बिठांवां कित्थे श्याम नूं,

दस देवो मैनूँ कोई ते सलाहां,

बिठांवां कित्थे श्याम नूं.....

करमां दा फल है या गल्ल है नसीब दी,

महलां तो वी उच्ची अज कुल्ली है गरीब दी,

आईया रास अज्ज मंगीया दुआंवां,

बिठांवां कित्थे श्याम नूं.....

आसन मैं जिस थां लगाया वेखो ठीक ए,

भोग वाला थाल जो सजाया वेखो ठीक ए,

फुल्ल हार दस्सो किन्ने कू मंगांवा,

बिठांवां कित्थे श्याम नूं.....

सज्जरे प्यार विच, कमी न कोई रह जावे,

मान सत्कार विच, कमी न कोई रह जावे,

ऐहो सोच-सोच घबरावा,

बिठांवां कित्थे श्याम नूं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।