मन लागो मेरो यार

संत कबीर
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मन लागो मेरो यार,

लागे फकीरी में,

मन लागो मेरो यार,

लागे फकीरी में…….

जो सुख पाया राम भजन में,

जो सुख पाया राम भजन में,

वो सुख पाया ना और,

जो सुख पाया राम भजन में,

वो कहीं ना और…….

मन लागो मेरो यार,

लागे फकीरी में,

मन लागो मेरो यार,

लागे फकीरी में…….

राम रामेति रामेति,

रमे रामे मनोरमे,

सहस्रनाम तत्तुल्यं,

रामनाम वरानने……

राम रामेति रामेति,

रमे रामे मनोरमे,

सहस्रनाम तत्तुल्यं,

रामनाम वरानने……..

कबीरा तेरी झोपड़ी,

गल कटियन के पार,

जो जैसा करेगा वैसा भरेगा,

तू क्यूँ होये उदास…….

क्या लेके आया रे बंदें,

क्या लेके जाएगा,

खाली हाथ आया था,

खाली हाथ जाएगा,

खाली हाथ जाएगा…….

मन लागो मेरो यार,

लागे फकीरी में,

मन लागो मेरो यार,

लागे फकीरी में…..

माला फेरत जुग भया,

फिरा ना मन का फेर,

कर का मन का डार दे,

मन का मन का फेर……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।