शिव के नाग की फुफ्कार

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले जी इन्हे पारे हटा,

देख देख मेरा जिया डरे,

तेरे गले में नाग फुफ्कार भरे,

शिव के नाग की फुफ्कार भरे…..

भोले जी इन्हे पारे हटा,

देख देख मेरा जिया हिम्मत,

तेरे गले में नाग गौरी शंकर,

तेरे गले में नाग फुफ्कार भरे,

शिव के नाग की फुफ्कार भरे…..

गौरा तू क्यो हुए बावरी,

बिन छेड़े नाग ना ​​किसी के लड़े…..

गंगा तेरे सर में विराजे,

जिसमे मुरादो की रख बहे,

तेरे गले में नाग फुफ्कार भरे…..

गंगा गंगा मत कोसे गौर,

ये दुनिया के पाप हरे,

बिन छेड़े नाग ना ​​किसी के लड़े,

जय जय गौरी शंकर जय जय गौरी शंकर……

भूत पिसाच रहे तेरे संग में,

भूत रहे तेरे संग में,

इनसे तेरे भगत हिम्मत,

तेरे गले में नाग फुफ्कार भरे…….

भूत प्रेत मरघाट के वासी,

बिन मतलब ना तांग करे,

बिन छेड़े नाग ना ​​किसी के लड़े…..

मूसाक मोर डरे तेरे नाग से,

इन्हें कैसे वास में करें,

तेरे गले में नाग फुफ्कार भरे….

कार्तिक गणपति प्यारे दुलारे,

ये सबको कंट्रोल करे,

बिन छेड़े नाग ना ​​किसी के लड़े…..

भोले जी इन्हे पारे हटा,

देख देख मेरा जिया हिम्मत,

तेरे गले में नाग गौरी शंकर,

तेरे गले में नाग फुफ्कार भरे,

शिव के नाग की फुफ्कार भरे…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।