पार्वती पती शिव जी की जय जय

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरी ऊँची है शान मेरी बिगड़ी तू जान,

तूँ ही है इस जग का विधाता,

सुन मेरी ये बात बाबा ओ भोलेनाथ,

तू ही पिता ओर तूँ ही मेरी माता....

ओ भोलेनाथ ओ शम्भूनाथ,

मेरे सर पे तेरा हाथ जेसे गौरा तेरे साथ,

भोले की जय जय शिव जी की जय जय ,

पार्वती पती शिव जी की जय जय...

हिमालय की वादियों मे डेरा तेरा डेरा तेरा ,

तू हे मेरा बाबा मैं हूँ बालक तेरा,

अरे तू है मेरा बाबा मैं हूँ बालक तेरा,

तेरे डमरु की जय जय त्रीशूल कि जय जय,

तेरे ऊँचे ऊँचे कैलाशो की जय जय,

भोले की जय जय शिव जी की जय जय,

पार्वती पती शिव जी की जय जय….

जपता हूँ तेरा नाम ओं भोले सुबह शाम,

ओर जपूँ माला तेरी ओं बाबा तेरी,

तुने डुबती नैया पार लगा दी मेरी तुने मेरी,

तेरे चंदा की जय जय सूरज की जय जय,

तेरे काले काले सर्पों की जय जय,

भोले की जय जय शिव जी की जय जय,

पार्वती पती शिव जी की जय जय....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।