नाम भोले का लेकर जो चला रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

श्री महाँकाल के नशे में पूरी दुनिया डोलती है,

श्री महाँकाल के नशे में पूरी दुनिया डोलती है,

और मैं क्या,

तुमारी भाभी भी जय श्री महाँकाल बोलती है,

जय श्री महाँकाल…..

हो उज्जैन वाले महाँकाल राजा,

जग में तेरा है मुझको सहारा…..

नाम भोले का लेकर जो चला रे चला,

नाम भोले का लेकर जो चला रे चला,

नाम भोले का लेकर चला रे चला,

नाम शिव जी का लेकर चला रे चला,

नाम शंकर का लेकर चला रे चला,

नाम भोले का लेकर जो चला रे चला....

है भरोसा जिन्हें अपने महाँकाल पर,

है भरोसा जिन्हें अपने भोलेनाथ पर,

हो अपने महाँकाल पर हो अपने भोलेनाथ पर,

दूर रहती है उससे हर बला रे बला,

नाम भोले का लेकर चला रे चला,

नाम शिव जी का लेकर चला रे चला,

नाम शंकर का लेकर चला रे चला,

नाम भोले का लेकर जो चला रे चला.....

बेटे भोला सब जानता है कि यहाँ कौन कौन छानता है,

और जो भोले के नाम की छानता है,

भोला उसी की मानता है,

इसलिए केते है कि,

छान छान किसी की मत मान,

जब निकल जाएंगे प्राण तो कौन बोलेगा बेटे छान,

जय श्री महाँकाल…….

हो उनके घर पर मुसीबत कोई आती नही,

उनके घर पर मुसीबत कोई आती नही,

हो उनके घर पर मुसीबत कोई आती नही,

जिसने चौखट पे सर को धरा रे धरा,

नाम भोले का लेकर चला रे चला,

नाम शिव जी का लेकर चला रे चला,

नाम शंकर का लेकर चला रे चला,

नाम भोले का लेकर जो चला रे चला....

अरे महाँकाल के बेटे है इसलिए चुप चाप बैठे है,

वरना जो हमसे ऐंठे है,

सीधे शमशान में लेटें,

जय श्री महाँकाल…….

हो प्रेमी पागल पे ऐसी है दया आपकी,

सारे भक्तो पे ऐसी है दया आपकी,

सारे भक्तो पे ऐसी है दया आपकी,

देख कर ये जमाना जला रे जल,

नाम भोले का लेकर चला रे चला,

नाम शिव जी का लेकर चला रे चला,

नाम शंकर का लेकर चला रे चला,

नाम भोले का लेकर जो चला रे चला.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।