आया सावन सुहाना है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आया सावन सुहाना है शिव के घर जाना है,

कोई दे दो रे ठिकाना, मुझे कावड़ चढ़ाना है,

हरी ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ नमः शिवाय.....

नहीं देखा में उसको नहीं देखा वो मुझको,

फिर भी मन ये माने महादेव सदा उसको,

में ऐसे समझता हूँ सब साथ पुराना है,

कोई दे दो रे ठिकाना, मुझे कावड़ चढ़ाना है,

हरी ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ नमः शिवाय.....

कहते हैं सब मुझको भोला भंडारी है,

जो शरण पड़ा उसकी हर विपदा टाली है,

ऐसे में पाऊँ तुम्हें होकर में दीवाना,

कोई दे दो रे ठिकाना, मुझे कावड़ चढ़ाना है,

हरी ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ नमः शिवाय.....

गल में सोहे इनके सर्पों की माला है,

रहता है मस्त सदा पिए भंग का प्याला है,

मस्तक चंदा सोहे कहता ये ज़माना है,

कोई दे दो रे ठिकाना, मुझे कावड़ चढ़ाना है,

हरी ॐ नमः शिवाय, हरी ॐ नमः शिवाय.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।