हे पवन के तनय वीर हनुमान

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हे पवन के तनय वीर हनुमान जी,

कब से करता विनय आप आ जाइये ।

नाव मजधार में आज मेरी फसी,

पार आकरके उसको लगा जाइए॥

बालेपन में ही भक्षण किया सूर्य का,

तीनो लोकों में छाया अंधेरा घना ।

वीर बजरंग बाँके महावीर फिर ,

अपना बल और पराक्रम दिखा जाइये ॥

वीरता में पराक्रम में बलबुद्धि में,

भक्ति में भाव में कोई तुझसा नही ।

बस उसी भक्ति का भाव संसार को,

फिर से आके जरा सा दिखा जाइए ॥

नाम लेने से ही बस महावीर का,

दूर संकट सभी झट से हो जाते हैं ।

अम्बिका हैं शरण में ये राउर तेरे,

लाज निर्मोही की अब बचा जाइये ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।