सात समंदर लांघ के हनुमत

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए,

हनुमत लंकानगरी आ गए….

ऐसा किया कमाल देखकर लंकावासी डर गए,

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए,

लँकापुर पहुंचे हनुमत जी, किया प्रभु का ध्यान,

मात सिया को खोजे पवनसुत लंका में अनजान,

असुरों संग बैठी मेरी माँ ये देख क्रोध में आ गए,

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए....

राम निशानी लिए पवनसुत पहुंचे माँ के पास,

देख निशानी जनकनन्दिनी व्याकुल भई उदास,

हनुमत मेरे प्राण….

हनुमत मेरे प्राणनाथ को छोड़ कहाँ तुम आ गए,

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए,

भूख लगी ले आज्ञा पवनसुत चले बगिया की और,

तोड़ तोड़ फल खाने लगे और फेंके चारों और,

देख तबा ही…

देख तबाही बगिया की रावण के सैनिक आ गए,

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए,

बनाके बंदी रावण सन्मुख खूब किया अपमान,

सहन हुआ नही रावण से लगवा दी पूंछ में आग,

क्रोधित बजरंगी…….

क्रोधित बजरंगी लंका में आग लगाके आ गए,

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए,

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए,

हनुमत लंकानगरी आ गए…….

ऐसा किया कमाल देखकर लंकावासी डर गए,

सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।