आयु तेरी बीत रही है

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॥ पावन पाठ ॥

आयु तेरी बीत रही है कुछ तो सोच विचार,

जन्म ये मिले ना बारम्बार....

माया का ये पिंजरा मानव निश दिन होता जाये पुराना,

जीवन पंशी बड़ा सयाना इक दिन इसने है उड़ जाना,

जाके फिर ना आयेगा जब छोड़ गया संसार,

जन्म ये मिले ना बारम्बार....

सच बता कभी हरी गुण गाया नेक कर्म ना कोई कमाया,

जोड़ जोड़ करी झूठी माया अपना ही जन्म गावया,

रत्न मिला अनमोल था तुझको दिया है इसको हार,

जन्म ये मिले ना बारम्बार....

जीवन सफल बना ले बंदे जग से प्रीत हटा ले बंदे,

क्या मिले दुनिया दारी से प्रीत लगा सतगुरु से बंदे,

समझ उसी को मात पिता बन्धु रिश्तेदार,

जन्म ये मिले ना बारम्बार....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।