सतगुरु के चरणों में बस मेरा ठिकाना है

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॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु के चरणों में, बस मेरा ठिकाना है,

चरणों में छुपा तेरे, गुरु ज्ञान खजाना है....

मोह माया में फंसकर, तुझको ही मैं भूल गया,

जो शरण पड़ा तेरी, झट तूने कबूल किया,

अब ज्ञान का हृदय में, एक दीप जलाना है,

चरणों में छुपा तेरे, गुरु ज्ञान खजाना है....

मैं भटक रहा कब से, मंजिल ही नहीं मिलती,

सुने मन उपवन में, कलिया ही नहीं खिलती,

मेरे मन का मुरझाया, वह फूल खिलाना है,

चरणों में छुपा तेरे, गुरु ज्ञान खजाना है....

अंधियारा मिटा दो तुम, प्रभु महिमा मैं गांऊं,

संतो के समागम में, भीतर तक रम जाऊं,

इस भक्त को मुक्ति का, रस्ता दिखलाना है,

चरणों में छुपा तेरे, गुरु ज्ञान खजाना है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।