चुरू वाले चले आओ

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - अकेले है चले आओ

चुरू वाले चले आओ कहाँ हो,

सुनलो आवाज ओ बाबा जहाँ हो,

चुरू वाले चले.....

तुम्हे सब कुछ पता है, मेरी क्या ये खता है,

मैं हारा हूँ जहाँ से न मिलता रास्ता है,

चुरू वाले चले.....

दिल मे है जो जख्म ओर गम, लगादो उस पे मरहम,

अगर तुम न सुनोगे तो, कहाँ जाये बता हम,

चुरू वाले चले.....

तुम्हे दिल मे बसाकर, देव "दिलबर" ने रखा,

कोई तेरे सिवा न, हमपे बाबा रहम कर,

चुरू वाले चले.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।