गौरी के पुत्र गणेश शारदा तोहै सुमुरू

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गौरी के पुत्र गणेश शारदा तोहै सुमुरू....

कहां बैठेंगी मात शारदा कहां पर गौरी गणेश,

कहां बैठेंगे गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

मंदिर बैठी मांत शारदा आले‌ गौरी गणेश,

ऊंचे सिंहासन गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

क्या पहनेगी मां शारदा क्या पहने गौरी गणेश,

क्या पहनेंगे गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

लहंगा पहने मां शारदा पटका गौरी गणेश,

पीला पितांबर गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

क्या खाएंगी मां शारदा क्या खामे गोरी गणेश,

क्या खाएंगे गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

हलवा खावे मां शारदा लड्डू गौरी गणेश,

मेवा खावे गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

क्या कुछ देंगी मात शारदा क्या दें गौरी गणेश,

क्या देवेगे गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

अन्न धन देगी मां शारदा बुद्धि गौरी गणेश,

ज्ञान ध्यान दें गुरु हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश,

शारदा तोहै सुमिरू....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।