ॐकार स्वरुपा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ॐकार स्वरुपा, सद्गुरु समर्था,

अनाथाच्या नाथा, तुज नमो, तुज नमो,

तुज नमो, तुज नमो, तुज नमो....

नमो मायबापा, गुरुकृपाघना,

तोडी या बंधना मायामोहा,

मोहोजाल माझे कोण नीरशील,

तुजविण दयाला सद्गुरुराया,

तुज नमो, तुज नमो, तुज नमो.....

सद्गुरुराया माझा आनंदसागर,

त्रैलोक्या आधार गुरुराव,

गुरुराव स्वामी असे स्वयंप्रकाश,

ज्या पुढे उदास चंद्र, रवी,

रवी, शशी, अग्नि, नेणती ज्या रुपा,

स्वप्रकाशरुपा नेणें वेद,

तुज नमो, तुज नमो, तुज नमो…….

एका जनार्दनी गुरुपरब्रम्ह,

तयाचे पै नाम सदा मुखी,

तुज नमो, तुज नमो, तुज नमो,

ॐकार स्वरुपा, सद्गुरु समर्था,

अनाथाच्या नाथा, तुज नमो, तुज नमो,

तुज नमो, तुज नमो, तुज नमो…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।