मैं ना जीऊँ बिन राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम,

राम लखन सिया वन को सिधाये (गमन),

(पिता) राउ गये सुर धाम,

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम….

कुटिल कुबुद्धि कैकेय नंदिनि,

बसिये ना वाके ग्राम,

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम…….

प्रात भये हम ही वन जैहैं,

अवध नहीं कछु काम,

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम,

तुलसी भरत प्रेम की महिमा,

रटत निरंतर नाम,

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम……..

राम लखन सिया वन को सिधाए,

राउ गये सुर धाम,

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम।

कुटिल कुबुद्धि कैकेय नंदिनि,

बसिये ना वाके ग्राम,

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम……….

प्रात भये हम ही वन जैहैं,

अवध नहीं कछु काम

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम…..

तुलसी भरत प्रेम की महिमा,

रटत निरंतर नाम,

जननी मैं ना जीऊँ बिन राम…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।