शिवोहम शिवोहम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आत्मा ने परमात्मा को लिया देख ध्यान की दृष्टि से,

प्रकाश हुआ हृदय-हृदय, बेड़ा पार हुआ इस सृष्टि से…

है एक ओंकार निरंजन निरंकार,

है अजर अमर आकर विश्वधार मन भजे…..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम,

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

भूख में तपसी तप रहा, भोजन बीच पठाय,

विलप में साधु हंस रहा, अपना ही उपजा खाय,

शेष अशेष विशेष में समर्पण के भाव में……

शिवोहम शिवोहम शिवोहम,

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

ठहर शांत एकांत में, साधके मूलाधार,

सर्जन स्वाधिष्ठान से, सूर्य मणि चमकार,

विशुद्धि आज्ञा सहसरार तक गूंजे अनाहत…..

शिवोहम शिवोहम शिवोहम,

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

खाली को तो भर दिया, भरे में भरा न जाए,

पानी में प्यासा रहा, तट पे बैठ लखाय,

प्रष्न व्यस्न में उलझ-उलझ हां बिरथा गया जन्म……

शिवोहम शिवोहम शिवोहम,

शिवोहम शिवोहम शिवोहम..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।