भोले ऐसी कृपा बरसा दे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले ऐसी कृपा बरसा दे,

है दीवाने तेरे, है दीवाने तेरे,

इन दीवानो से अंखिया मिला ले,

भोले ऐसी कृपा बरसा दे……

बिन तुम्हारी मेहर भोले शंकर,

बिन तुम्हारी मेहर भोले शंकर,

कैसे संवरेगी ये, कैसे संवरेगी ये,

ज़िंदगानी मेरी समझा दे,

भोले ऐसी कृपा बरसा दे……..

धन दौलत की किसको तमन्ना,

धन दौलत की किसको तमन्ना,

मैं भिखारी तेरे, मैं भिखारी तेरे,

दर्शनों का तू दर्शन करा दे,

भोले ऐसी कृपा बरसा दे……..

मेरे दिल को लगन बस तुम्हारी,

मेरे दिल को लगन बस तुम्हारी,

‘नंदू’ कुछ ना मिले, ‘नंदू’ कुछ ना मिले,

प्रेम गंगा में डुबकी लगा दे,

भोले ऐसी कृपा बरसा दे……..

चाहूँ चरणों में तेरे ठिकाना,

चाहूँ चरणों में तेरे ठिकाना,

तेरी मर्जी है क्या, तेरी मर्जी है क्या,

फैसला भोले अपना सुना दे,

भोले ऐसी कृपा बरसा दे……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।