भोले के रंग में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मस्ती सी छायी है भरया उमंग में,

मैं तो रंग गया रे इस भोले के रंग में....

देखे से या दुनिया सारी प्यारा लगे से मैंने भोला भंडारी,

देखे से या दुनिया सारी प्यारा लगे से मैंने भोला भंडारी,

आज जीतना से मैंने आज भक्ति की जंग में,

मैं तो रंग गया रे इस भोले के रंग में,

मस्ती सी छायी है भरया उमंग में,

मैं तो रंग गया री भोले के रंग में....

जल्दी चिलम का सुट्टा लगाओ,

भर के भांग का लोटा पिलाओ,

मैं तो रंग गया रे इस भोले के रंग में....

सजा हुआ हर द्वार सारा भोले मैंने लगे प्यारा,

तीनो लोक में तेरे नाम के लगते है जयकारे,

डमरू वाले भोले बाबा हर कोई तुझे पुकारे,

मैं तो रंग गया रे इस भोले के रंग में……

अच्छी लागे से मैंने भोले की बूटी,

जल्द चढ़ाना मंगल खापुटी,

राहुल चाले गए अंकुर के सांग में,

मैं तो रंग गया रे इस भोले के रंग में…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।