रहते हो कहाँ सन्यासी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कोई कहे कैलाशो के तुम हो वासी,

कोई कहे तुम रहते हो काशी॥

हिमाचल की बेटी गौरा तेरी दासी,

रहते हो कहाँ सन्यासी॥

कोई कहे कैलाशो के तुम हो वासी,

कोई कहे तुम रहते हो काशी॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।