॥ पावन पाठ ॥
कोई कहे कैलाशो के तुम हो वासी,
कोई कहे तुम रहते हो काशी॥
हिमाचल की बेटी गौरा तेरी दासी,
रहते हो कहाँ सन्यासी॥
कोई कहे कैलाशो के तुम हो वासी,
कोई कहे तुम रहते हो काशी॥
कोई कहे कैलाशो के तुम हो वासी,
कोई कहे तुम रहते हो काशी॥
हिमाचल की बेटी गौरा तेरी दासी,
रहते हो कहाँ सन्यासी॥
कोई कहे कैलाशो के तुम हो वासी,
कोई कहे तुम रहते हो काशी॥