बेटी है एक रतन अमोल

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॥ पावन पाठ ॥

बेटी है एक रतन अमोल कोख में मत मरबईयो रे,

मत मरबईयो रे कोख में मत मरबईयो रे,

बेटी है एक रतन अमोल कोख में मत मरबईयो रे....

जा दिन बेटी जन्म ले खुशी खूब मनईयो रे,

6 दिन की है जाए तो बाकी छठी पुजईयो रे,

बेटी है एक रतन अमोल कोख में मत मरबईयो रे....

10 दिन की है जाए तो वह को नाम धरईयो रे,

5 साल की होय पाठशाला भिजबईयो रे,

बेटी है एक रतन अमोल कोख में मत मरबईयो रे....

तन मन से बेटी को तुम सब खुब पढईयो रे,

टीचर तहसीलदार बेटी को जज बनईयो रे,

बेटी है एक रतन अमोल कोख में मत मरबईयो रे....

20 और 21 साल की को ब्याह रचईयो रे,

बेटी योग देखकर आपस में मिलबईयो रे,

बेटी है एक रतन अमोल कोख में मत मरबईयो रे....

बेटी और बेटा में कोई मत भेद बनियों रे,

कहे संत बेटी कोई कारण खूब कमईयों रे,

बेटी है एक रतन अमोल कोख में मत मरबईयो रे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।