तुम हो दया के सागर

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

तुम हो दया के सागर,

क्या बात है तुम्हारी,

कृपा जो तुम करो तो,

मिट जाए विपदा सारी,

गौरी सुत गण नायक,

विनायक गजमुख धारी,

तुम हो दया के सागर....

सद्गुणों से बनी है,

गणराज तुम्हारी काया,

संसार में किसी ने,

पार ना इसका पाया,

जिसने भी देखा तुमको,

वो हो गया बलिहारी,

तुम हो दया के सागर....

विघ्नों को हरने वाले,

दुख हमारे भी हरना,

सुखों को देने वाले,

सुख जीवन में भरना,

शुभ लाभ उसे है मिलता,

जो आए शरण तुम्हारी,

तुम हो दया के सागर....

प्रथम हो पूजे जाते,

हो तुम प्रथम देव हमारे,

दीन हीन दुखियों के,

हो तुम्हीं तो सहारे,

सहारा हमें भी दे दो,

सहारा राजीव को दे दो,

है अरदास ये हमारी,

तुम हो दया के सागर....

राजीव त्यागी नजफगढ़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।