प्रभु हम पे दया करना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु हम पे दया करना,

प्रभु हम पे कृपा करना,

बैकुंठ यही पे है, हृदय में रहा करना.....

गूंजेगे राग बनकर, वीणा की तार बनकर,

प्रगटोगे नाथ ह्रदय में तुम सुंदर प्यार बनकर,

हर रागिनी की धुन पर स्वर बन कर उठा करना....

नाचेंगे मोर बनकर हे श्याम तेरे द्वारे,

घनश्याम छाए रहना बनकर के मेघ कारे

अमृत की धार बनकर प्यासों पे दया करना....

तेरे वियोग में हम, दिन रात हैं उदासी,

अपनी शरण में लेलो हे नाथ ब्रज के वासी,

तुम सो हम शब्द बन कर प्राणों में रमा करना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।