मेरे कल्ला जी महाराज

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॥ पावन पाठ ॥

कल्लाजी महाराज मेरे कल्लाजी,

चित्तौड़ी सिरताज मेरे कल्लाजी,

कल्लाजी महाराज मेरे कल्लाजी,

मेवाड़ी सिरमोड़ मेरे कल्लाजी....

जब जब हम पे संकट आया,

हर संकट को दूर भगाया,

आपने हमको गले लगाया,

मेरे कल्लाजी कल्लाजी मेरे कल्लाजी....

जिस दिन कल्ला जग में आये,

श्वेत कुंवर के मन को भाए,

देख देखकर मन ही मन में,

अचल सिंह हरषाये...

मीरा बाई के प्राण...मेरे कल्लाजी,

मेड़तिया सरदार...मेरे कल्लाजी,

घर घर मंगल गीत सुनाए,

जयमल जी आनंद मनाए,

मन ही मन मुस्काये,

मेरे कल्लाजी कल्लाजी मेरे कल्लाजी....

एक वार में कल्लाजी ने,

दुष्ट पेमला मार गिराया,

राष्ट्र धर्म की रक्षा हेतु,

तज तोरण चित्तौड़ पधार्या,

कृष्णा के भरतार...मेरे कल्लाजी,

जीवन के आधार...मेरे कल्लाजी,

जयमल जी को कन्ध बिठाकर,

रूप चतुर्भुज दिव्य बनाकर,

रण कौशल दिखलाये,

मेरे कल्लाजी कल्लाजी मेरे कल्लाजी....

भक्तों के हित त्याग स्वर्ग को,

धरा धाम पर आए,

ठाकुरजी की कृपा दृष्टि की,

कितनी महिमा गाए,

हैं अनाथ के नाथ...मेरे कल्लाजी,

शेषनाग अवतार...मेरे कल्लाजी,

दो नैनों के जाल बिछाकर,

प्यारी सी मुस्कान दिखाकर,

सबके मन को भाए,

मेरे कल्लाजी कल्लाजी मेरे कल्लाजी....

बोलिये कमधज कल्ला राठौड़ की...जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।