बस तुम्हीं मिला मन मीत

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़ :- कोई बिछुड़़ गया मिल के

बस तुम्हीं मिला मन मीत,

आके करदे मेरी जीत रे

बस...

ये जग झुठा सपनां है,

कोई नहीं यहां अपना है,

ईक तेरे सिवा अब मनमोहन,

ग़मख़ार‌ नहीं कोई अपनां है

सुंन मेरे मन के मीत,

आके करदे मेरी जीत,

बस....

इस स्वार्थी दुनिया के अन्दंर,

दिखा ना कोई दिलदार मुझे,

ये जग झुठा सपनां है,

अब तेरा नाम ही जपनां है

स्वार्थ के सब मीत,

आके करदे मेरी जीत रे,

बस....

पागल की बात जब मानीं थी,

मोहनीं सुरत पहचानीं थी

तब ये दुनिया बैगानीं थी,

हर बात यहां अन्जांनी थी,

धसका मिल गया मनका मीत,

आके कर दी तेरी जीत,

ईक वोही मिला मन मीत....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।